Daily Charts

Most Popular on 21st of July, 2021
#श्रीकिलकारीबाबाभैरवनाथ जी पांडवों कालीन मंदिर, बाबा भैरव नाथ जी को समर्पित हैं, जोकि भगवान शिव का एक उग्र अवतार माने जाते हैं।
माना जाता है कि महाभारत के युद्ध से पहले भीम ने इस क्षेत्र में निवास करते हुए सिद्धियाँ प्राप्त की थी।
महाभारत युद्ध जीतने के बाद,पांडवों,..
1


2
विशेषकर भीम ने इस क्षेत्र में मंदिर बनाने की शुरुआत की थी।
प्राचीन मंदिर के दो अलग-अलग खंड हैं जिनमे से एक #दुधियाभैरवमंदिर जहाँ दूध चढ़ाया जाता है,और दूसरा #किलकारीभैरवमंदिर है जहाँ शराब अर्पित की जाती है।
दुधिया भैरव मंदिर में भक्तों द्वारा बाबा भैरव नाथ पर कच्चा ..


3
(बिना पका) दूध चढ़ाया जाता हैं।
किलकारी भैरव मंदिर एकमात्र मंदिर है जहाँ भक्त प्रभु को शराब चढ़ा सकते हैं। यह शराब भक्तों को स्थानीय प्रसाद के रूप में वितरित भी की जाती है। परंतु यहां मदिरा बेचने पर प्राबंधी है।
दुधिया भैरव मंदिर के महंत के अनुसार, किलकारी भैरव नाथ मंदिर


4
मंदिर मे शराब चढ़ाने का कारण है कि लोग शराब की आदत छोड़ने पर अंतिम शराब भगवान पर प्रतिज्ञा के रूप में अर्पित करते हैं, तथा प्रार्थना करते है कि प्रभु उनकी इस बुरी आदत का अर्पण स्वीकार करें।
यह भक्त के ऊपर निर्भर करता है कि वो दूध अथवा मदिरा अर्पण करना चाहते है।

5
इस मंदिर में सभी मूर्तियों का निर्माण संगमरमर से किया गया है।
मंदिर के मुख्य देवता, भगवान भैरव, जिनका केवल चेहरे ही हैं और बहुत बड़ी आँखें हैं।
भगवान भैरव को सिद्धियों के भंडार के रूप में भी जाना जाता है। अतः तांत्रिक सिद्धियों में रुचि रखने वाले भक्त यहाँ नियमित रूप से बाबा
💞जब केवट ने पार लगाई श्रीराम की नैया 💞
निषादराज गुह मछुआरों और नाविकों के मुखिया थे।श्रीराम को जब वनवास हुआ तो वे सबसे पहले तमसा नदी पहुंचे,जो अयोध्या से 20किमी दूर है।इसके बाद गोमती नदी पार कर वे प्रयागराज से श्रृंगवेरपुर पहुंचे,जो निषादराज का राज्य था।यहीं पर गंगा के तट पर...


..उन्होने केवट से गंगा पार कराने को कहा था।
केवट ने उन्हें उपर से नीचे तक देखा तो वे उन्हें निहारते ही रह गए और समझ गए कि ये प्रभु श्रीराम है।श्रीराम केवट से कहते हैं कि मुझे उस पार जाना है तो क्या मुझे नदिया पार करा दोगे। 

🌺मागी नाव न केवटु आना।
कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना ।।🌺

श्री राम केवट से नाव मांगते हैं पर वह लाता नहीं है।वह कहने लगा कि मैंने तुम्हारा भेद जान लिया है।तुम्हारे चरण कमलों की धूल के लिए सब लोग कहते हैं कि वह मनुष्य बना देने वाली कोई जड़ी है।जिसके छूते ही पत्थर की शिला सुंदर स्त्री हो गई तो मेरी नाव तो काठ की है।काठ तो पत्थर से कठोर...


...भी नहीं होता।यदि मेरी नाव का आपके चरणों से स्पर्श हो गया तो कदाचित वह भी सुन्दर स्त्री हो जाएगी और मेरी रोजी मारी जाएगी।मैं तो लूट जाऊंगा।मैं तो इस नाव के सहारे ही परिवार का भरण पोषण करता हूं,दूसरा कोई धंधा नहीं जानता।

🌺जौं प्रभु पार अवसि गा चहहू।
मोहि पद पदुम पखारन कहहू।।🌺

हे प्रभु!यदि आप अवश्य ही पार जाना चाहते हैं तो मुझे पहले अपने चरण कमल पखार लेने दीजिए।

🌺पद कमल धोइ चढ़ाइ नाव न नाथ उतराई चहौं। मोहि राम राउरि आन दसरथसपथ सब साची कहौं।।
बरू तीर मारहुं लखनु पै जब लागि न पाय पखारिहौं ।।🌺
Most Popular on 20th of July, 2021
Most Popular on 19th of July, 2021
#MangalPandey
(19 July, 1827)
A heartful tribute to the First Freedom Fighter MangalPandey on his Birth Anniversary, who's sacrifice sparked the revolt of 1857. His sacrifice and courage will always be remembered. 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏


Born on 19 July 1827 at Nagwa, Ballia district, of UP and Sacrificed his life on 8 April 1857 (aged 29) Barrackpore, Calcutta, Bengal Province, British India.

Mangal Pandey was an Indian soldier who played a key part in events immediately preceding the outbreak of the Indian rebellion of 1857. He was a sepoy in the 34th Bengal Native Infantry regiment of the British East India Company.

Remembering some of his famous quotes on his birth anniversary to pay him a warm tribute for his supreme sacrifice for our Great Nation.

1- आज तक आपने हमारी वफादारी देखी थी अब हमारा क्रोध देखिये।

2- यह आज़ादी की लड़ाई है, ग़ुज़रे हुए कल से आज़ादी,आने वाले कल के लिए।

3- बन्दूक बड़ी बेवफा माशूका होती है कब किधर मुँह मोड़ ले कोई भरोसा नहीं।

4- किसी भी धर्म के लोगों का गोंमांस खाना एक पाप है, और यदि आप हिन्दू है तो ये एक कलंक भी है।

5-हमारी आज़ादी के लिए लड़ाई एक चिंगारी है जो भविष्य में विकराल रूप लेगी।

🇮🇳🇮🇳🇮🇳Bharat Mata ki Jai🇮🇳🇮🇳🇮🇳
Most Popular on 18th of July, 2021
Most Popular on 17th of July, 2021
रामायण के हर 1000 श्लोक के बाद आने वाले पहले अक्षर से गायत्री मंत्र बनता हैl

आपने बचपन से सुना होगा, कि जब भी किसी समस्या के कारण मन शांति खोने लगे तो ‘गायत्री मंत्र’ का जप करने से मन को शांति मिलती है. बल्कि अधिकतर प्रार्थनाओं में भी गायत्री मंत्र का उच्चारण किया जाता है.


बड़े-बुर्जुगों द्वारा कहा जाता है कि इस मंत्र के रोजाना उच्चारण करने मात्र से ही, कई समस्याओं और विपदाओं का नाश होता है. आपने भी ध्यान दिया होगा कि वेदों और पुराण में कई मंत्र ऐसे हैं जिनके बारे में कोई शायद ही जानता हो या फिर किसी को याद हो.


लेकिन ‘गायत्री मंत्र’ के बारे में अधिकतर लोग जानते हैं. शास्त्रों के अनुसार ‘गायत्री मंत्र’ की उत्पत्ति ऋषि विश्वामित्र ने अपने कठोर तप से की थी. ऋगवेद में यह मंत्र संस्कृत में लिखा गया था.


इसलिए गायत्री मंत्र का उच्चारण बहुत आवश्यक माना जाता है. गायत्री मंत्र से जुड़ी सबसे खास बात ये है कि इस मंत्र के उच्चारण से, होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में न केवल भारत में कई धारणाएं हैं


बल्कि विदेशों में भी समूह में गायत्री मंत्र का उच्चारण करने के लिए सेमिनार का आयोजन किया जाता है. दक्षिण अमेरिका में गायत्री मंत्र पर रोजाना विशेष कार्यक्रम, वहां के मुख्य रेडियो स्टेशनों पर किया जाता है...
Most Popular on 16th of July, 2021