What is best way to sell strangle in Banknifty on an intraday basis
Simple
at 9:45 Open Option chain and check In which strike highest OI change in call side and put side

Sell both option with combine SL
Enjoy easy and simple intraday trading strategy
Today 35000CE and 34500PE

More from Jig's Patel

Guys,
Today I am sharing how I will filter out the stock for intraday trade,

This strategy is called "NR21-VWAP" trading,

For filtering the stock I will use NR21 + Inside bar theory (its a very old but popular theory),

Filtering stock used below screener end of the day
(1/n)

Screener
https://t.co/SSPkYEoFMP

You have to do homework at the end of the day, Run the screener and List out the stock in this screener, hardly 3-4 stock in the list,

Next day trading, Just open chart 15 min TF,
Add VWAP and Volume indicator in Chart,

(2/n)

Buy setup:
If stock price move above VWAP and with high volume then trade activated above VWAP,

SL is trade trigger candle Low,
Sell Setup:
price move below VWAP with volume than trade activated.
SL is high of that candle
(3/n)

Volume indicator,

Open the chart and see the volume of last ten to fifteen 15 Min TF candle volume compare with a current candle if the volume is more than triple then our trade is right,

(4/n)

Eg. Yesterday filtered stock attached,

See the example of BERGEPAINT,

Trade activated at 532.27 and SL 527, Closing price 555

Profit booking criteria, I believe in 1:2 RR, if 5 point SL then I will book 10 point profit,

If you Like kindly RETWEET to reach maximum trader,

More from Optionslearnings

You May Also Like

हिमालय पर्वत की एक बड़ी पवित्र गुफा थी।उस गुफा के निकट ही गंगा जी बहती थी।एक बार देवर्षि नारद विचरण करते हुए वहां आ पहुंचे।वह परम पवित्र गुफा नारद जी को अत्यंत सुहावनी लगी।वहां का मनोरम प्राकृतिक दृश्य,पर्वत,नदी और वन देख उनके हृदय में श्रीहरि विष्णु की भक्ति अत्यंत बलवती हो उठी।


और देवर्षि नारद वहीं बैठकर तपस्या में लीन हो गए।इन्द्र नारद की तपस्या से घबरा गए।उन्हें हमेशा की तरह अपना सिंहासन व स्वर्ग खोने का डर सताने लगा।इसलिए इन्द्र ने नारद की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को उनके पास भेज दिया।वहां पहुंच कामदेव ने अपनी माया से वसंतऋतु को उत्पन्न कर दिया।


पेड़ और पौधों पर रंग बिरंगे फूल खिल गए और कोयलें कूकने लगी,पक्षी चहकने लगे।शीतल,मंद,सुगंधित और सुहावनी हवा चलने लगी।रंभा आदि अप्सराएं नाचने लगीं ।किन्तु कामदेव की किसी भी माया का नारद पे कोई प्रभाव नहीं पड़ा।तब कामदेव को डर सताने लगा कि कहीं नारद क्रोध में आकर मुझे श्राप न देदें।

जैसे ही नारद ने अपनी आंखें खोली, उसी क्षण कामदेव ने उनसे क्षमा मांगी।नारद मुनि को तनिक भी क्रोध नहीं आया और उन्होने शीघ्र ही कामदेव को क्षमा कर दिया।कामदेव प्रसन्न होकर वहां से चले गए।कामदेव के चले जाने पर देवर्षि के मन में अहंकार आ गया कि मैने कामदेव को हरा दिया।

नारद फिर कैलाश जा पहुंचे और शिवजी को अपनी विजयगाथा सुनाई।शिव समझ गए कि नारद अहंकारी हो गए हैं और अगर ये बात विष्णु जी जान गए तो नारद के लिए अच्छा नहीं होगा।ये सोचकर शिवजी ने नारद को भगवन विष्णु को ये बात बताने के लीए मना किया। परंतु नारद जी को ये बात उचित नहीं लगी।