Would you like to live in a UFO? Well in 1968 you could, thanks to Finnish architect Matti Suuronen. He created the Futuro House and for a while it was a worldwide sensation!

Let's take a look around...

The Futuro was a round prefabricated house initially designed as a ski chalet. Quick to build and easy to heat it reflected the optimism of the times.
Inside the spacious Futuro were all the 1960s mod cons: a central cooker/heater, reclining chairs, funky furniture and cool, crisp lines. Did it have shagpile carpets? Of course it did!
The Futuro was made of fibreglass- reinforced polyester and was light enough to be towed to any location. You literally moved house.
But its futuristic design caused an immediate backlash: Futuro houses were banned from many municipalities by zoning regulations because they didn't 'blend in' with the environment. Production was halted in the mid 1970s.
Only 100 or so Futuro houses were ever sold, and by the 1990s many had been abandoned, neglected or vandalised.
But I'm pleased to say that Futuro houses are now being restored worldwide. In fact they are a collectors item, and can command a high price.
Would you want to live in a Futuro? Why not! Comfortable, sociable and unique they're a tribute to a time when we were optimistic about the future.
So here's to the Futuro: proof that if you build it (and properly maintain it!) they will come.

Bookshelves are a bit tricky to put up in them though...

More from Pulp Librarian

More from History

You May Also Like

🌺कैसे बने गरुड़ भगवान विष्णु के वाहन और क्यों दो भागों में फटी होती है नागों की जिह्वा🌺

महर्षि कश्यप की तेरह पत्नियां थीं।लेकिन विनता व कद्रु नामक अपनी दो पत्नियों से उन्हे विशेष लगाव था।एक दिन महर्षि आनन्दभाव में बैठे थे कि तभी वे दोनों उनके समीप आकर उनके पैर दबाने लगी।


प्रसन्न होकर महर्षि कश्यप बोले,"मुझे तुम दोनों से विशेष लगाव है, इसलिए यदि तुम्हारी कोई विशेष इच्छा हो तो मुझे बताओ। मैं उसे अवश्य पूरा करूंगा ।"

कद्रू बोली,"स्वामी! मेरी इच्छा है कि मैं हज़ार पुत्रों की मां बनूंगी।"
विनता बोली,"स्वामी! मुझे केवल एक पुत्र की मां बनना है जो इतना बलवान हो की कद्रू के हज़ार पुत्रों पर भारी पड़े।"
महर्षि बोले,"शीघ्र ही मैं यज्ञ करूंगा और यज्ञ के उपरांत तुम दोनो की इच्छाएं अवश्य पूर्ण होंगी"।


महर्षि ने यज्ञ किया,विनता व कद्रू को आशीर्वाद देकर तपस्या करने चले गए। कुछ काल पश्चात कद्रू ने हज़ार अंडों से काले सर्पों को जन्म दिया व विनता ने एक अंडे से तेजस्वी बालक को जन्म दिया जिसका नाम गरूड़ रखा।जैसे जैसे समय बीता गरुड़ बलवान होता गया और कद्रू के पुत्रों पर भारी पड़ने लगा


परिणामस्वरूप दिन प्रतिदिन कद्रू व विनता के सम्बंधों में कटुता बढ़ती गयी।एकदिन जब दोनो भ्रमण कर रहीं थी तब कद्रू ने दूर खड़े सफेद घोड़े को देख कर कहा,"बता सकती हो विनता!दूर खड़ा वो घोड़ा किस रंग का है?"
विनता बोली,"सफेद रंग का"।
तो कद्रू बोली,"शर्त लगाती हो? इसकी पूँछ तो काली है"।
I'm going to do two history threads on Ethiopia, one on its ancient history, one on its modern story (1800 to today). 🇪🇹

I'll begin with the ancient history ... and it goes way back. Because modern humans - and before that, the ancestors of humans - almost certainly originated in Ethiopia. 🇪🇹 (sub-thread):


The first likely historical reference to Ethiopia is ancient Egyptian records of trade expeditions to the "Land of Punt" in search of gold, ebony, ivory, incense, and wild animals, starting in c 2500 BC 🇪🇹


Ethiopians themselves believe that the Queen of Sheba, who visited Israel's King Solomon in the Bible (c 950 BC), came from Ethiopia (not Yemen, as others believe). Here she is meeting Solomon in a stain-glassed window in Addis Ababa's Holy Trinity Church. 🇪🇹


References to the Queen of Sheba are everywhere in Ethiopia. The national airline's frequent flier miles are even called "ShebaMiles". 🇪🇹
शमशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायी और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में अपने तीन वर्ष के बालक को रख के स्वयं चिता पे बैठ कर सती हो गयी ।इस प्रकार ऋषी दधीचि और उनकी पत्नी की मुक्ति हो गयी।


परन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़पने लगा। जब कुछ नहीं मिला तो वो कोटर में पड़े पीपल के गोदों (फल) को खाकर बड़ा होने लगा। कालान्तर में पीपल के फलों और पत्तों को खाकर बालक का जीवन किसी प्रकार सुरक्षित रहा।

एक दिन देवर्षि नारद वहां से गुजर रहे थे ।नारद ने पीपल के कोटर में बालक को देख कर उसका परिचय मांगा -
नारद बोले - बालक तुम कौन हो?
बालक - यही तो मैं भी जानना चहता हूँ ।
नारद - तुम्हारे जनक कौन हैं?
बालक - यही तो मैं भी जानना चाहता हूँ ।

तब नारद ने आँखें बन्द कर ध्यान लगाया ।


तत्पश्चात आश्चर्यचकित हो कर बालक को बताया कि 'हे बालक! तुम महान दानी महर्षि दधीचि के पुत्र हो । तुम्हारे पिता की अस्थियों का वज्रास्त्र बनाकर ही देवताओं ने असुरों पर विजय पायी थी।तुम्हारे पिता की मृत्यु मात्र 31 वर्ष की वय में ही हो गयी थी'।

बालक - मेरे पिता की अकाल मृत्यु का क्या कारण था?
नारद - तुम्हारे पिता पर शनिदेव की महादशा थी।
बालक - मेरे उपर आयी विपत्ति का कारण क्या था?
नारद - शनिदेव की महादशा।
इतना बताकर देवर्षि नारद ने पीपल के पत्तों और गोदों को खाकर बड़े हुए उस बालक का नाम पिप्पलाद रखा और उसे दीक्षित किया।