आकार त्रय संपन्नाम् अरविन्द निवासिनीम्।
अशेष जगदीशित्रीम् वन्दे वरद वल्लभाम्॥

अस्मन्मातरम्... शरणमहं प्रपद्ये!!
❤️❤️❤️❤️🙏🙏🙏🙏
1/n

I pay my salutations to the most beloved One of the granter of all boons, Sri Varadaraja, who resides on a Lotus, is the ruler of all worlds and acts as a पुरुषकार or mediatrix for erring chethanas like me,...2/n
burdened with the weight of countless sins and thus unworthy of the अनुग्रहं of Her Bhagavan. Through her limitless Dayaa for her children, she pleads with Her Bhagavan to overlook our sins and bless us with His अनुग्रहं. 3/n
During Prapatti, she accepts the Bharam of the prapanna and acts as a सहकारिन्, she reinforces Her Bhagavan's Bhara-sveekara sankalpam along with Her own sankalpam. 4/n
After thus blessing the बद्ध जीवन् to become a मुक्त जीवन्, she enhances the ruchi for kainkaryam in Sri Vaikuntam. She is thus endowed with the 3 capacities-उपायत्वम्(being the means), उपेयत्वम्(being the end) and पुरुषकारत्वम्(mediatrix)! 5/5
🙏🙏🙏🙏
@amrita_1272 @GDhulipati @kgdhouhithri @MohanShobitha @Grounded_Wisdom @CVeeraraghavan @lalitha_jr @Varsha69396205

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क्या आप जानते हैं कि क्या है, पितृ पक्ष में कौवे को खाना देने के पीछे का वैज्ञानिक कारण!

श्राद्ध पक्ष में कौओं का बड़ा ही महत्व है। कहते है कौआ यम का प्रतीक है, यदि आपके हाथों दिया गया भोजन ग्रहण कर ले, तो ऐसा माना जाता है कि पितरों की कृपा आपके ऊपर है और वे आपसे ख़ुश है।


कुछ लोग कहते हैं की व्यक्ति मरकर सबसे पहले कौवे के रूप में जन्म लेता है और उसे खाना खिलाने से वह भोजन पितरों को मिलता है

शायद हम सबने अपने घर के किसी बड़े बुज़ुर्ग, किसी पंडित या ज्योतिषाचार्य से ये सुना होगा। वे अनगिनत किस्से सुनाएंगे, कहेंगे बड़े बुज़ुर्ग कह गए इसीलिए ऐसा करना

शायद ही हमें कोई इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण बता सके।

हमारे ऋषि मुनि और पौराणिक काल में रहने वाले लोग मुर्ख नहीं थे! कभी सोचियेगा कौवों को पितृ पक्ष में खिलाई खीर हमारे पूर्वजों तक कैसे पहुंचेगी?

हमारे ऋषि मुनि विद्वान थे, वे जो बात करते या कहते थे उसके पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण छुपा होता था।

एक बहुत रोचक तथ्य है पितृ पक्ष, भादो( भाद्रपद) प्रकृति और काक के बीच।

एक बात जो कह सकते कि हम सब ने स्वतः उग आये पीपल या बरगद का पेड़/ पौधा किसी न किसी दीवार, पुरानी

इमारत, पर्वत या अट्टालिकाओं पर ज़रूर देखा होगा। देखा है न?

ज़रा सोचिये पीपल या बरगद की बीज कैसे पहुंचे होंगे वहाँ तक? इनके बीज इतने हल्के भी नहीं होते के हवा उन्हें उड़ाके ले जा सके।