RANI NAIKI DEVI AND THE BATTLE OF KASAHRADA

Mohammad Ghori, the young Ghurid Prince conquered Ghaznavids in Afghanistan in the year 1173 CE. He conducted some successful raids into the Indian territory, which even Mahmud Ghazni & the Persians couldn't do.

First&foremost,Ghori invaded states of Multan &Uch in India.After this he turned to southern states of Gujarat &Rajputana.Everybody knows this about Ghori,but what most pple r unaware of is the defeat he suffered at hands of Chalukyan Queen Naiki Devi in 1178 Battle of Kasahrada.
When he marched southwards, his first target was the prosperous fortified town of Anhilwara Patan.
It was the capital of Chalukyas(also known as Solankis of Gujarat) which was established by Vanraj of Chapotkata Dynasty in 8th century.
American historian Tertius Chandler states that it was the 10th largest city in the world at that time. The history of Chalukyas has been written by many historians, but the valour of the Great Queen Naiki Devi remains unsung.
Born to the Kadamba King Paramardin of Goa,Naiki Devi was well trained in sword fighting, horse riding, strategy & every other subject of Statesmanship. She was married to King Ajaypala of Gujarat who sat on throne in 1171CE. Unfortunately,the King died within 4 yrs of his rule.
His elder Son Mularaja II became his successor but it was Rani Naiki Devi who ruled on his behalf as the Queen Regent as he was still a minor. It was during this time only that Ghori invaded Multan, established Ghurid Empire in Afghanistan and was eyeing Anhilwara Patan.
Motivated by the Mahmud Ghazni raid stories and all the wealth that India had to offer, Ghori decided to invade India.He was confident or I must say over-confident to assume that he will capture Anhilwara as there is no King and what resistance an army lead by woman will provide.
He was having these golden dreams in his cruel greedy eyes which were soon to be shattered.
Undaunted by Ghori's possible attack, Naiki Devi took command of the Chalukyan force and strategically organized a well planned counter-attack.
She sent ambassadors to nearby provinces in order to built strategically crucial alliance against the invading enemy. While most of the major Kingdoms didn't respond, she got help from Chalukyan friends like Nadulla Chahman Clan, Jalor Chahman Clan and Arbud Parmar Clan.
Chalukyan Kingdom then consisted of Gujarat and Rajasthan. Realising that the Chalukyan Army is outnumbered, Rani Naiki Devi chose the rugged terrain of Gadaraghatta-near the foot of Mt Abu near village Kasahrada as the site of battle. This was unfamiliar ground for Ghori's Army.
This was the masterstroke by Rani as it gave a huge advantage to her army over the enemy forces.When Ghori arrived Kasahrada, the fiercesome Queen rode into the battle with her son tied on her lap leading a deadly counter-offensive. Ghori's army was full of experienced soldiers.
They were xcellent archers and had bulls like stamina. On top of it, they were motivated by religious zest and enthusiasm. Alike all other Islamic invaders, they were obsessed with killing Kafirs and convert whole non-muslim lands to Islamic ruled.
It's believed that before the battle Ghori sent a messenger to the court of Rani Naiki Devi with a condition that he will not attack if the Queen surrenders to him. Hearing it, Rani approached Ghori camp with her son tied to her lap.
Just when he was thinking that Rani accepted his offer,the army of fierce Rajputs &its war elephants crushed the invading Ghurids who had once beaten the mighty sultans of Multan in Battle. The combined force of the Rajputs under the Queen Naiki Devi wreaked havoc on the Ghurids.
Rani &her forces tore apart the morale of Ghori's experienced army.Strong willed Rani with her unmatchable combat skills,cut down every single Islamic invader dat came in her path.Most astonishing of the fact is dat while all this action was going on,her son was tied to her body.
This Battle turned out to be a major disaster to Mohammad Ghori. Facing a crushing defeat, he fled with a handful of bodyguards and somehow saved himself. His pride was crumbled and he never tried to invade Gujarat again.
As far as the Battle of Kasahrada is concerned, had the fierce warrior Queen of the Chalukyas not taken charge, the Indian history would've been very different.
Battle of Kasahrada was such a turning point in the Chalukyan and Indian History, but the woman who was responsible to create this history doesn't find a mention in the History Textbooks.

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🌺कैसे बने गरुड़ भगवान विष्णु के वाहन और क्यों दो भागों में फटी होती है नागों की जिह्वा🌺

महर्षि कश्यप की तेरह पत्नियां थीं।लेकिन विनता व कद्रु नामक अपनी दो पत्नियों से उन्हे विशेष लगाव था।एक दिन महर्षि आनन्दभाव में बैठे थे कि तभी वे दोनों उनके समीप आकर उनके पैर दबाने लगी।


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कद्रू बोली,"स्वामी! मेरी इच्छा है कि मैं हज़ार पुत्रों की मां बनूंगी।"
विनता बोली,"स्वामी! मुझे केवल एक पुत्र की मां बनना है जो इतना बलवान हो की कद्रू के हज़ार पुत्रों पर भारी पड़े।"
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महर्षि ने यज्ञ किया,विनता व कद्रू को आशीर्वाद देकर तपस्या करने चले गए। कुछ काल पश्चात कद्रू ने हज़ार अंडों से काले सर्पों को जन्म दिया व विनता ने एक अंडे से तेजस्वी बालक को जन्म दिया जिसका नाम गरूड़ रखा।जैसे जैसे समय बीता गरुड़ बलवान होता गया और कद्रू के पुत्रों पर भारी पड़ने लगा


परिणामस्वरूप दिन प्रतिदिन कद्रू व विनता के सम्बंधों में कटुता बढ़ती गयी।एकदिन जब दोनो भ्रमण कर रहीं थी तब कद्रू ने दूर खड़े सफेद घोड़े को देख कर कहा,"बता सकती हो विनता!दूर खड़ा वो घोड़ा किस रंग का है?"
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और देवर्षि नारद वहीं बैठकर तपस्या में लीन हो गए।इन्द्र नारद की तपस्या से घबरा गए।उन्हें हमेशा की तरह अपना सिंहासन व स्वर्ग खोने का डर सताने लगा।इसलिए इन्द्र ने नारद की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को उनके पास भेज दिया।वहां पहुंच कामदेव ने अपनी माया से वसंतऋतु को उत्पन्न कर दिया।


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इन मंदिरों में कभी पंरपराओं के जरिए मानव सभ्‍यता को संभालने के संदेश मिलते हैं तो कभी अनेकता में एकता का सूत्र देखने और सुनने को मिलता है। ऐसा ही मंदिर है दार्जीलिंग की वादियों में। जहां दो धर्म एक साथ पूजे जाते हैं। वह भी अलग-अलग स्‍थानों की बजाए एक ही स्‍थान पर।

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Viruses and other pathogens are often studied as stand-alone entities, despite that, in nature, they mostly live in multispecies associations called biofilms—both externally and within the host.

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Microorganisms in biofilms are enclosed by an extracellular matrix that confers protection and improves survival. Previous studies have shown that viruses can secondarily colonize preexisting biofilms, and viral biofilms have also been described.


...we raise the perspective that CoVs can persistently infect bats due to their association with biofilm structures. This phenomenon potentially provides an optimal environment for nonpathogenic & well-adapted viruses to interact with the host, as well as for viral recombination.


Biofilms can also enhance virion viability in extracellular environments, such as on fomites and in aquatic sediments, allowing viral persistence and dissemination.
1️⃣ #KashmiriPandits के खिलाफ आतंकवाद का ये खूनी खेल शुरू हुआ था साल 1986-87 में, जब सलाहुद्दीन और यासीन मलिक जैसे आतंकवादियों ने J&K का चुनाव लड़ा॥

नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के गठबंधन की सरकार बनी लेकिन वहां हुकूमत चल रही थी आतंकवादियों और अलगाववादियों की. #KashmirExodus1990


2️⃣ चुनावों में हार से नाख़ुश यासीन मलिक का संगठन JKLF (Jammu Kashmir liberation front) जो “भारत से अलग” होना चाहता था उसने पाकिस्तान के साथ मिलकर घाटी में “आतंकी प्रवृत्ति को बढ़ाकर कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी से निकालने के षडयंत्र” के तहत अपने संगठन को विस्तृत करना शुरू किया॥


3️⃣
पाकिस्तान की मदद से JKLF ने अपने सदस्यों को POK मैं आतंकवाD की ट्रेनिंग दिलवाई,हथियार मुहैया करवाये JKLF ने कश्मीर घाटी के लोगों को भारत और कश्मीरी पंडितों के ख़िलाफ़ भड़काना शुरू किया, हालात यहाँ तक बिगाड़ दिए थे की JKLF के आतंकी घाटी की गलियों में AK-47 लेके घूमते थे!


4️⃣1988 अंत तक JKLF ने भारत से कश्मीर को आज़ाद कर ISLAM!C RULE (निज़ाम-E-मुस्तफ़ा) स्थापित करने के लिए अपनी आतंकी गतिविधियों को तेज कर दिया, कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडित Minority मे थे; जो कश्मीरी पंडित भारत के साथ रहने की बात करता था उसको को जान से मारने की धमकी दी जाने लगी॥

5️⃣ तत्कालीन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने कश्मीर घाटी में जिहाD को बढ़ावा देने के लिए POK में सैकड़ों कश्मीर घाटी के उग्रवादियों को Training देकर आतंकी बनाया और हथियार मुहैया कराए गए॥ कश्मीरी पंडितों में डर फैला कर घाटी से निकालने के लिए TARGET करना शुरु हो चुका था॥

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Хајде да направимо мали осврт на случај Мика Алексић .

Алексић је жртва енглеске освете преко Оливере Иванчић .
Мика је одбио да снима филм о блаћењу Срба и мењању историје Срба , иза целокупног пројекта стоји дипломатски кор Британаца у Београду и Оливера Иванчић


Оливера Илинчић је иначе мајка једне од његових ученица .
Која је претила да ће се осветити .

Мика се налази у притвору због наводних оптужби глумице Милене Радуловић да ју је наводно силовао човек од 70 година , са три бајпаса и извађеном простатом пре пет година

Иста персона је и обезбедила финансије за филм преко Беча а филм је требао да се бави животом Десанке Максимовић .
А сетите се и ко је иницирао да се Десанка Максимовић избаци из уџбеника и школства у Србији .

И тако уместо романсиране верзије Десанке Максимовић утицај Британаца

У Србији стави на пиједестал и да се Британци у Србији позитивно афирмишу како би се на тај начин усмерила будућност али и мењао ток историје .
Зато Мика са гнушањем и поносно одбија да снима такав филм тада и почиње хајка и претње која потиче из британских дипломатских кругова

Најгоре од свега што је то Мика Алексић изговорио у присуству високих дипломатских представника , а одговор је био да се све неће на томе завршити и да ће га то скупо коштати .
Нашта им је Мика рекао да је он свој живот проживео и да могу да му раде шта хоће и силно их извређао