In #Hinduism the e concept of #Kuladevata and #Kuldevi is very essential & significant. . Puja of which helps in avoiding all forms of untoward incidents in life. Our #Purvaj or ancestors originated from
from any #Rishi who himself originated from any Devta.

Since Kuldevta and Kuldevi have a direct link with your DNA, they are considered more close to you as compared to other Devtas. In this way they are also your family's first line of defense against negative energies. Regular worship and hom of Kuldevta creates a shield around.
Practice of worshipping them initiated by Our forefathers. Any ceremony is incomplete without their rituals. There are Kuldevta temples where the family has been worshipping for generations .
‘Shri Kuladevatayai Namaha’. 🙏🏼🙏🏼
Once the chanting of the Name of the Kuladevata is completed, the Guru Himself comes into the seeker’s life and blesses him with a Gurumantra.

#SanatanaDharma 🚩🚩

More from Anita 🇮🇳

हमारे #सनातन धर्म में #तिलक को बहुत महत्त्व दिया गया है,
इसी कारण हमारे पूर्वज कभी बिना तिलक नहीं रहते थे इतना ही नहीं कई लोग तो बिना तिलक के रात्रि में सोते भी नहीं थे क्योंकि उनका यही मानना था की क्या पता मौत कब आ जाये और कब इस शरीर को छोड़कर यमलोक प्रस्थान करना पड़े।


सनातन धर्म में प्रचलित सभी #परम्परों के पीछे कोई न कोई कारण आपको अवश्य मिलेगा।तिलक लगाने के वैज्ञानिक तथ्य भी है जो लोग तिलक लगाते है उनमे क्रोध की भावना कम होती हैं तथा तिलक मस्तिष्क को ढंडा बनाये रखता है।हमने अपने बड़े बुजुर्गो की तस्वीरों को देखा होगा।


उनकी तस्वीर में वे सदैव मस्तक पर तिलक लगाया करते थे।आज हिन्दुओं के घर से तिलक लगाने की परम्परा लुप्त हो चुकी है । परंतु हिन्दू परंपरा के अनुसार ललाट (माथे) को सुना नहीं रखना चाहिए।किसी प्रकार का तिलक या टीका अवश्य लगाना चाहिए।

सभी विभिन्न तिलकों में एक नाम आता है , #गोपी चंदन।
वैष्णव तिलक गोपी-चन्दन से लगाया जाता है।इस तिलक को देखते ही #भगवान श्री कृष्ण का स्मरण होता है। यह तिलक मानव शरीर को शुद्ध कर बुरे प्रभाव से रक्षा भी करता है।


#गर्ग संहिता के अनुसार जो मनुष्य प्रतिदिन गोपी-चंदन का वैष्णव तिलक धारण करता है। उसे एक हजार #अश्वमेघ यज्ञों तथा राजसूय यज्ञों का फल प्राप्त होता है। गोपी-चंदन से वैष्णव तिलक धारण करने वाला पापी मनुष्य भी भगवान कृष्ण के धाम, गोलोक वृन्दावन को प्राप्त होता है।
मोक्ष की नगरी #काशी के कण कण में विराजमान हैं भगवान #शिव । यहां की संस्कृति और परंपराओं में शिव के विराट व्यक्तित्व की झलक दिखाई देती है। मतस्य पुराण के अनुसार भगवान शिव स्वयं मरते हुए व्यक्ति के कानों में #तारक मंत्र का उपदेश सुनाते हैं और #मोक्ष प्राप्त हो जाता है।


अर्थात उस व्यक्ति को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। शिव-पार्वती का ये पावन स्थान मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि एक भक्त को भगवान शिव ने सपने में दर्शन देकर कहा था कि गंगा स्नान के बाद उसे दो शिवलिंग मिलेंगे और जब वो

उन दोनों शिवलिंगों को जोड़कर उन्हें स्थापित करेगा तो शिव और शक्ति के दिव्य शिवलिंग की स्थापना होगी और तभी से भगवान शिव यहां मां पार्वती के साथ विराजमान हैं| बाबा की आज्ञा से यहाँ मन्दिर का निर्माण हुआ ।


मंदिर के ऊपर के सोने के छत्र को ले कर यह मान्यता है कि अगर उसे देख कर कोई मुराद मांगी जाती है तो वह अवश्य ही पूरी होती है। रानी अहिल्या द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार कराने के पश्चात इंदौर के महाराज रणजीत सिंह ने मंदिर पर सोना लगाने का कार्य किया था ।


#गंगा किनारे बसा यह शहर कई बार तबाही और निर्माण का साक्षी बना है, जिसका असर काशीनाथ मंदिर पर भी पड़ा।परंतु जहाँ देवाधिदेव महादेव स्वयं बैठे हो वहाँ सिर्फ़ कल्याण होता है .. नकारात्मक शक्तियाँ दूर रहती हैं।

More from All

You May Also Like