पर अब देख रहा हूँ की भगवा चोला,बुद्धिजीवी का लबादा, पत्रकारिता का मुखौटा ओढ़ कुछ लोग 1/n
सोने जा रहा था ... अब नींद उड़ चुकी है!
थोड़ा ज्यादा ही "नीलकंठ" बनने लगा हूँ| पर अगर ज़रा सा विष नहीं उगला तो आप सभी को लगेगा की विष होता ही नहीं है|
अतः विषपान का आनंद लें और मेरी आगे की ट्वीट @Hiranyareta जी की ट्वीट के साथ मिला के पढ़ें|
All the people behind this scaremongering are the hardcore Congressis.I am sure most of them must be running restaurants on the Ghats selling chicken, egg,meat for the consumption of foreign tourists.
— \u0939\u093f\u0930\u0923\u094d\u092f\u0930\u0947\u0924\u093e (@Hiranyareta) May 12, 2018
But at the present they are saving Hindu-heritage.\U0001f600 https://t.co/0UUzAFEalw
पर अब देख रहा हूँ की भगवा चोला,बुद्धिजीवी का लबादा, पत्रकारिता का मुखौटा ओढ़ कुछ लोग 1/n
समय आ चुका है की जो इच्छा रखते हैं उनसे सत्य का परिचय कराया जाए| तो यदि आप इस "सत्य" को जानना चाहते हैं तो ध्यान से आगे पढ़ें|
अगर मैं गलत हूँ तो बताएँ, खुद को सुधारने में मैं समय नहीं लूँगा ! 2/2
दीवाल से घिरा हुआ, एक मंदिर? जिसको घेर कर कब धाराशायी कर के गेस्ट हाउस में तब्दील कर देंगे पता ही नहीं चलेगा|
ये किसने किया ?? मोदी जी ने ??
किसी ने भी ऐसे सैकड़ों निर्माणों का विरोध किया ??
कहाँ है मंदिर ?? क्या इस प्राचीन मंदिर के चारों और उसक सौन्दर्य को कोढ़ सी दीवार भी मंदिर के साथ ही बनी थी??
उत्तर आप सभी जानते हैं - नहीं !!
ये कौन लोग है जो इन प्राचीन मंदिरों का विनाश कर रहे हैं ???
क्या इस चित्र को देख कर क्रोध, बेबसी और इस कृत्य को करने वालों से घृणा नहीं हो रही ???
ये मोदी जी ने किया ???
कैसे मंदिर के गुम्बद को समाप्त कर धीरे धीरे कमरे में तब्दील किया जा रहा है!!
कभी सुना इसका विरोध?? क्या ये विनाश मोदी जी ने किया???
क्या प्राचीन मंदिरों के अगल बगल कुकुरमुत्ते सी उग आई इमारतें हमारी धरोहर हैं??
दिग्भ्रमित करने वाले मिथ्या संवादों व् तथाकथित आन्दोलनों से यह सत्य छुपेगा की पाप हो रहा था!! खुलेआम !!
आप स्वयं देखिये, काशी में लालच का यह नंगा नाच हर कदम पर दिखेगा|पांडित्य का लबादा ओढ़े ठग श्लोकों में कुकृत्य छुपायेंगे|
पर सच सूर्य सा होता है , छुपता नहीं !!
और पत्रकारिता को निकृष्टतम गहराइयों तक ले जा चुके पत्रकार आज उनके साथ कदम से कदम मिलाकर खड़े हैं !!
कैसे इस विग्रह को कमरे में लील कर ऊपर से सीढ़ी बना दी गयी थी।
इन्हें दीवारों में लोभवश चिनवा देने वाले किस प्रकार के लोग होंगे???
किराये पर उठाने के लिए अटैच्ड टॉयलेट वाले अनाधिकृत कमरे और मलजल गंगाजी में।
आज सब खड़े हैं धरोहर बचाने का लबादा ओढ़े!!!
ये प्रबुद्ध लोग निरंतर भ्रम फैला रहे हैं। तो मैं आप सभी के समक्ष कुछ तस्वीरें ग्राउंड ज़ीरो से प्रस्तुत करता हूँ।
धैर्य से खुला दिमाग रख के देखें।
क्या आपको बायीं तरफ एक छोटे से मंदिर का केसरिया रंग का शिखर दिख रहा है??
कुछ समय पहले तक यहाँ केवल कमरे ही कमरे थे।
पुरातन मंदिरों को मुक्त करने का यह प्रयास किस कोने से हमारी धरोहर नष्ट करना लग रहा है ये मैं समझना चाहता हूँ ।
और कौन सनातनी हिन्दू होगा जो मंदिरों के अतिक्रमण व दीवारों में चिनवाने का समर्थन करेगा ??
क्या आपको मंदिरों की यह दशा अच्छी लग रही है???
अगर नही तो फिर षड्यंत्रकारियों के कुत्सित प्रयासों को नाकाम कीजिये।
All of you are educated .. if possible ,try answering this question - What do you see in these pics? #Kashi
https://t.co/8cUhThuRhh
हो सकता है की मैं गलत हूँ , ये वीडियो गलत हो, आप स्वयं काशी जा के देखें, क्या मंदिरों का अतिक्रमण उचित है??
आस्था क्या मात्र व्यवसाय है??
सभी प्रबुद्ध हैं ,स्वयं सोचें।
क्या मंदिरों की इस अवस्था से आप सहमत हैं??
अपने विचार अवश्य व्यक्त करें |
(चित्र अनिरुद्ध पाण्डेय जी की फेसबुक वाल से)
ये किसने किया?
क्या मंदिरों की ऐसी हालत होनी चाहिए?
और कोई अगर इनके जीर्णोद्धार की बात करे तो उसपर "धरोहर" नष्ट करने का लांछन लगे ???
इस छोटी सी क्लिप में देखें एक बड़ा सा मंदिर जो भवन के अंदर था,अब दिखने लगा है।
और आज जब एक प्रयास हो रहा है इन सांस्कृतिक धरोहरों का ना केवल रक्षण किया जाए बल्कि आने वाले भविष्य के लिए भी उन्हें सजाया व सँवारा जाए तो विरोध हो रहा है??
जो काशी नहीं गए या जो हिंदी नहीं पढ़ सकते उनको इस वाक्य का न भाव समझ आएगा न ही अर्थ किंतु हर क्षण मोक्ष ही जी रहे हमारे जैसे तुच्छ प्राणियों को इस वाक्य में छिपी संभावनाओं के स्मरण या चिंतन से ही अनेकों स्वर्गों का सुख प्राप्त होगा!
आप ही बताइए क्या इस प्रकार का निर्णय लेना आसान कार्य था??
वह भी तब,जब अनेकों नर रूपी महासर्प कदम कदम पर मोदी जी को डसने के लिए फन उठाए बैठे हैं!!
लेकिन निर्णय लिया तो लिया!!
कोई भी ज़रा सी मेमने की खाल पहन कर आ के हमें हिन्दू धर्म के विनाश को दुहाई देता है तो हम मान लेते हैं क्योंकि तथ्य जानने में मेहनत लगती है।
ये कैद मंदिर भी प्रतीक्षा में हैं।
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