The vast majority of images are jpegs, which are internally 420 YUV, but they get converted to 32 bit RGB for use in apps. Using native YUV formats would save half the memory and rendering bandwidth, speed loading, and provide a tiny quality improvement. It would also be \

a good path to supporting better video codec still image formats and 10 bit components. You can do it today, but you need to do the color conversion manually in a shader, which can be a big ask for some devs. Defining a FMT_JPEG_YUV that does driver injection akin to the \
external image support on Android could make it much more of a drop-in. Even doing it the hard way seems like it would be worthwhile for web browsers today.

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THREAD: How is it possible to train a well-performing, advanced Computer Vision model 𝗼𝗻 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗣𝗨? 🤔

At the heart of this lies the most important technique in modern deep learning - transfer learning.

Let's analyze how it


2/ For starters, let's look at what a neural network (NN for short) does.

An NN is like a stack of pancakes, with computation flowing up when we make predictions.

How does it all work?


3/ We show an image to our model.

An image is a collection of pixels. Each pixel is just a bunch of numbers describing its color.

Here is what it might look like for a black and white image


4/ The picture goes into the layer at the bottom.

Each layer performs computation on the image, transforming it and passing it upwards.


5/ By the time the image reaches the uppermost layer, it has been transformed to the point that it now consists of two numbers only.

The outputs of a layer are called activations, and the outputs of the last layer have a special meaning... they are the predictions!

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हिमालय पर्वत की एक बड़ी पवित्र गुफा थी।उस गुफा के निकट ही गंगा जी बहती थी।एक बार देवर्षि नारद विचरण करते हुए वहां आ पहुंचे।वह परम पवित्र गुफा नारद जी को अत्यंत सुहावनी लगी।वहां का मनोरम प्राकृतिक दृश्य,पर्वत,नदी और वन देख उनके हृदय में श्रीहरि विष्णु की भक्ति अत्यंत बलवती हो उठी।


और देवर्षि नारद वहीं बैठकर तपस्या में लीन हो गए।इन्द्र नारद की तपस्या से घबरा गए।उन्हें हमेशा की तरह अपना सिंहासन व स्वर्ग खोने का डर सताने लगा।इसलिए इन्द्र ने नारद की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को उनके पास भेज दिया।वहां पहुंच कामदेव ने अपनी माया से वसंतऋतु को उत्पन्न कर दिया।


पेड़ और पौधों पर रंग बिरंगे फूल खिल गए और कोयलें कूकने लगी,पक्षी चहकने लगे।शीतल,मंद,सुगंधित और सुहावनी हवा चलने लगी।रंभा आदि अप्सराएं नाचने लगीं ।किन्तु कामदेव की किसी भी माया का नारद पे कोई प्रभाव नहीं पड़ा।तब कामदेव को डर सताने लगा कि कहीं नारद क्रोध में आकर मुझे श्राप न देदें।

जैसे ही नारद ने अपनी आंखें खोली, उसी क्षण कामदेव ने उनसे क्षमा मांगी।नारद मुनि को तनिक भी क्रोध नहीं आया और उन्होने शीघ्र ही कामदेव को क्षमा कर दिया।कामदेव प्रसन्न होकर वहां से चले गए।कामदेव के चले जाने पर देवर्षि के मन में अहंकार आ गया कि मैने कामदेव को हरा दिया।

नारद फिर कैलाश जा पहुंचे और शिवजी को अपनी विजयगाथा सुनाई।शिव समझ गए कि नारद अहंकारी हो गए हैं और अगर ये बात विष्णु जी जान गए तो नारद के लिए अच्छा नहीं होगा।ये सोचकर शिवजी ने नारद को भगवन विष्णु को ये बात बताने के लीए मना किया। परंतु नारद जी को ये बात उचित नहीं लगी।