Mark Hughes informuje, że Ferrari wróciło w sobotę do pakietu aerodynamicznego sprzed Singapuru. Informacje o nietrafionych poprawkach (podłoga), o których mówiłem w 101 odcinku magazynu okazały się prawdziwe. #F1pl

Kolejny raz Danił Kwiat miał pracowitą noc w symulatorze i zebrane dane wskazały, że stary pakiet pracuje wydajniej. #F1pl
Stary pakiet bardzo dobrze obchodził się z oponami. Jeśli mamy gdzieś szukać plusów, to chyba właśnie tam. Wysoka temperatura może im dziś sprzyjać. #F1pl

More from All

My top 10 tweets of the year

A thread 👇

https://t.co/xj4js6shhy


https://t.co/b81zoW6u1d


https://t.co/1147it02zs


https://t.co/A7XCU5fC2m
Twitter is a free university.

However, 98.8% of users did not see the top content on this site.

Here are the top threads from the past month:🧵

Collaborated with @niki_poojary

Topic: How to understand Volume in more depth.

This is my personal favorite in this


Topic: List of top


Topic: How to use Debit and Credit


Topic: What's happening to the

You May Also Like

हिमालय पर्वत की एक बड़ी पवित्र गुफा थी।उस गुफा के निकट ही गंगा जी बहती थी।एक बार देवर्षि नारद विचरण करते हुए वहां आ पहुंचे।वह परम पवित्र गुफा नारद जी को अत्यंत सुहावनी लगी।वहां का मनोरम प्राकृतिक दृश्य,पर्वत,नदी और वन देख उनके हृदय में श्रीहरि विष्णु की भक्ति अत्यंत बलवती हो उठी।


और देवर्षि नारद वहीं बैठकर तपस्या में लीन हो गए।इन्द्र नारद की तपस्या से घबरा गए।उन्हें हमेशा की तरह अपना सिंहासन व स्वर्ग खोने का डर सताने लगा।इसलिए इन्द्र ने नारद की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को उनके पास भेज दिया।वहां पहुंच कामदेव ने अपनी माया से वसंतऋतु को उत्पन्न कर दिया।


पेड़ और पौधों पर रंग बिरंगे फूल खिल गए और कोयलें कूकने लगी,पक्षी चहकने लगे।शीतल,मंद,सुगंधित और सुहावनी हवा चलने लगी।रंभा आदि अप्सराएं नाचने लगीं ।किन्तु कामदेव की किसी भी माया का नारद पे कोई प्रभाव नहीं पड़ा।तब कामदेव को डर सताने लगा कि कहीं नारद क्रोध में आकर मुझे श्राप न देदें।

जैसे ही नारद ने अपनी आंखें खोली, उसी क्षण कामदेव ने उनसे क्षमा मांगी।नारद मुनि को तनिक भी क्रोध नहीं आया और उन्होने शीघ्र ही कामदेव को क्षमा कर दिया।कामदेव प्रसन्न होकर वहां से चले गए।कामदेव के चले जाने पर देवर्षि के मन में अहंकार आ गया कि मैने कामदेव को हरा दिया।

नारद फिर कैलाश जा पहुंचे और शिवजी को अपनी विजयगाथा सुनाई।शिव समझ गए कि नारद अहंकारी हो गए हैं और अगर ये बात विष्णु जी जान गए तो नारद के लिए अच्छा नहीं होगा।ये सोचकर शिवजी ने नारद को भगवन विष्णु को ये बात बताने के लीए मना किया। परंतु नारद जी को ये बात उचित नहीं लगी।