🎨 The symbolism of colours with Michel Pastoureau #thread in #colour

🔵 Blue

🌊 Quiet,
🐑 Conformism,
🕵️ Discretion
🔴 Red

🔥 Fire and blood,
❤️👹Love and hell,
🤑 Prideful, full of ambition & power-hungry,
🤕 Lack of professionalism,
💰 Sign of power
⚪ White

✨ Purity,
🧒 Innocence,
👶☠Life and death,
🔱 Divine,
🛁 Cleanliness,
❄️ Cold
🍏 Green

👿 Hidden danger,
📉 Instability,
⚡🌿Ecology
📒 Yellow

😳 Disgracefulness,
🛂 Foreigner,
⛔🌏Stateless🌎🌍,
🤨 Distrust,
🔪 Betrayal
⚫ Black

☠️ Mourning,
🕴️ Elegance,
👩‍🎓 Serious
Half-colour
🌸 Pink

🤗 Tenderness,
🏳️‍🌈 Diversity,
🤟 Tolerance
Brown

💩 Dirt,
💲🚫Poverty,
💪 Brutality,
🙅‍ Abuse
🍊 Orange

🌶️ Heat,
🤣 Joy,
🌿 Tonus / Healthy,
👎 Vulgarity
🍆 Purple

🧟 Half-mourning,
👵 Old women,
Penitence
Grey

😔 Sadness,
😰 Melancholy,
🙄 Boredom,
🧓 Old age,
🧠 Intelligence
Sources:

Les couleurs expliquées en images - Michel Pastoureau & Dominique Simonnet

Couleurs le grand livre - Michel Pastoureau & Dominique Simonnet

Les couleurs de notre temps - Michel Pastoureau

Cover from Chris Lawton

Source: https://t.co/EVkj3NYzgI
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क्या आप जानते हैं कि क्या है, पितृ पक्ष में कौवे को खाना देने के पीछे का वैज्ञानिक कारण!

श्राद्ध पक्ष में कौओं का बड़ा ही महत्व है। कहते है कौआ यम का प्रतीक है, यदि आपके हाथों दिया गया भोजन ग्रहण कर ले, तो ऐसा माना जाता है कि पितरों की कृपा आपके ऊपर है और वे आपसे ख़ुश है।


कुछ लोग कहते हैं की व्यक्ति मरकर सबसे पहले कौवे के रूप में जन्म लेता है और उसे खाना खिलाने से वह भोजन पितरों को मिलता है

शायद हम सबने अपने घर के किसी बड़े बुज़ुर्ग, किसी पंडित या ज्योतिषाचार्य से ये सुना होगा। वे अनगिनत किस्से सुनाएंगे, कहेंगे बड़े बुज़ुर्ग कह गए इसीलिए ऐसा करना

शायद ही हमें कोई इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण बता सके।

हमारे ऋषि मुनि और पौराणिक काल में रहने वाले लोग मुर्ख नहीं थे! कभी सोचियेगा कौवों को पितृ पक्ष में खिलाई खीर हमारे पूर्वजों तक कैसे पहुंचेगी?

हमारे ऋषि मुनि विद्वान थे, वे जो बात करते या कहते थे उसके पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण छुपा होता था।

एक बहुत रोचक तथ्य है पितृ पक्ष, भादो( भाद्रपद) प्रकृति और काक के बीच।

एक बात जो कह सकते कि हम सब ने स्वतः उग आये पीपल या बरगद का पेड़/ पौधा किसी न किसी दीवार, पुरानी

इमारत, पर्वत या अट्टालिकाओं पर ज़रूर देखा होगा। देखा है न?

ज़रा सोचिये पीपल या बरगद की बीज कैसे पहुंचे होंगे वहाँ तक? इनके बीज इतने हल्के भी नहीं होते के हवा उन्हें उड़ाके ले जा सके।