EXPOSED: #AudreyTruschke

Audrey Truschke आजकल काफी सुर्ख़ियों में है। Audrey जी के अचानक भारत पर हमलवार होने के पीछे एक interesting कहानी है जो हर भारतीय को जानना बहुत जरूरी है।

असली कहानी ये नहीं है कि “वो क्या कह रही है” बल्कि कहानी ये है कि “वो कौन है?”

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शुरुआती रिसर्च में हमने पाया कि श्रीमती Audrey जी के ससुर जी श्री Nathan Rehn जी और उनके पति परमेश्वर श्री Thane Rehn जी का एक समय में भारत में चर्च/मिशनरी एक्टिविटीज का एक बहुत लम्बा चौड़ा धंधा था।

ससुर जी आज भी Baptist Church of Monterey, California में लीड पास्टर है।

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Nathan Rehn को भारत में कन्वर्जन व्यापार की इतनी बड़ी मार्केट दिखी कि उन्होंने तो भारत में ही एक NGO बना के आंध्र प्रदेश, ओड़िसा में अपने कन्वर्जन बिजनेस की ब्रांच खोल दी जिसका नाम Bless India Ministries Incorporated (BIMI) था, और जिसका motto था “To Win India For Christ”.

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ससुर जी की जो Bless India Ministries थी वो आंध्र प्रदेश में ससुर जी के ही शिष्य देवदास मेकाला द्वारा बनायी गयी “Christ the King of Kings Ministries Welfare Association” को करोड़ों रूपये सालाना फंड करती थी। सन 2010-2017 के बीच ही 6,86,85,000 रूपये तो सीधे तौर पर भेजे गये।

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Audrey के ससुर Nathan Rehn भारत में 2017 तक अलग अलग NGO को पैसा भेज कर आंध्र प्रदेश, ओड़िसा बोर्डर पर नई नई कनवर्जन ब्रांच खुलवाते रहे, लेकिन FCRA नियम में हुए बदलावों ने ससुर जी के पुश्तैनी धंधे पर विराम लगा दिया और 2017 के बाद से वो कोई रूपया ले/दे नहीं पाये।

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बस जिस दिन से Audrey के परिवार के इस धंधे पर भारत में चोट हुई है, उसी दिन से Audrey के जीवन का एक मात्र लक्ष्य औरंगजेब को महान और भारत को Fascist बताना हो गया है।

और दुनिया वो बहका रही हैं कि लड़ाई  विचारधारा की है, जबकि असली बात ये है  कि बात पारिवारिक बिजनेस  की है।

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इस थ्रेड में हमने जाना कि Audrey Truschke अचानक से क्यूँ भारत के खिलाफ activate की गयी।

अगले थ्रेड में हम बताएँगे कि इस काम के लिए Audrey जी को ही क्यूँ चुना गया और पाकिस्तान, जमात ए इस्लामी के अमेरिका बेस्ड fronts ICNA, IAMC, CAIR-NJ etc का Audrey के पीछे क्या रोल है।

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कुंडली में 12 भाव होते हैं। कैसे ज्योतिष द्वारा रोग के आंकलन करते समय कुंडली के विभिन्न भावों से गणना करते हैं आज इस पर चर्चा करेंगे।
कुण्डली को कालपुरुष की संज्ञा देकर इसमें शरीर के अंगों को स्थापित कर उनसे रोग, रोगेश, रोग को बढ़ाने घटाने वाले ग्रह


रोग की स्थिति में उत्प्रेरक का कार्य करने वाले ग्रह, आयुर्वेदिक/ऐलोपैथी/होमियोपैथी में से कौन कारगर होगा इसका आँकलन, रक्त विकार, रक्त और आपरेशन की स्थिति, कौन सा आंतरिक या बाहरी अंग प्रभावित होगा इत्यादि गणना करने में कुंडली का प्रयोग किया जाता है।


मेडिकल ज्योतिष में आज के समय में Dr. K. S. Charak का नाम निर्विवाद रूप से प्रथम स्थान रखता है। उनकी लिखी कई पुस्तकें आज इस क्षेत्र में नए ज्योतिषों का मार्गदर्शन कर रही हैं।
प्रथम भाव -
इस भाव से हम व्यक्ति की रोगप्रतिरोधक क्षमता, सिर, मष्तिस्क का विचार करते हैं।


द्वितीय भाव-
दाहिना नेत्र, मुख, वाणी, नाक, गर्दन व गले के ऊपरी भाग का विचार होता है।
तृतीय भाव-
अस्थि, गला,कान, हाथ, कंधे व छाती के आंतरिक अंगों का शुरुआती भाग इत्यादि।

चतुर्थ भाव- छाती व इसके आंतरिक अंग, जातक की मानसिक स्थिति/प्रकृति, स्तन आदि की गणना की जाती है


पंचम भाव-
जातक की बुद्धि व उसकी तीव्रता,पीठ, पसलियां,पेट, हृदय की स्थिति आंकलन में प्रयोग होता है।

षष्ठ भाव-
रोग भाव कहा जाता है। कुंडली मे इसके तत्कालिक भाव स्वामी, कालपुरुष कुंडली के स्वामी, दृष्टि संबंध, रोगेश की स्थिति, रोगेश के नक्षत्र औऱ रोगेश व भाव की डिग्री इत्यादि।

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॥ॐ॥
अस्य श्री गायत्री ध्यान श्लोक:
(gAyatri dhyAna shlOka)
• This shloka to meditate personified form of वेदमाता गायत्री was given by Bhagwaan Brahma to Sage yAgnavalkya (याज्ञवल्क्य).

• 14th shloka of गायत्री कवचम् which is taken from वशिष्ठ संहिता, goes as follows..


• मुक्ता-विद्रुम-हेम-नील धवलच्छायैर्मुखस्त्रीक्षणै:।
muktA vidruma hEma nIla dhavalachhAyaiH mukhaistrlkShaNaiH.

• युक्तामिन्दुकला-निबद्धमुकुटां तत्वार्थवर्णात्मिकाम्॥
yuktAmindukalA nibaddha makutAm tatvArtha varNAtmikam.

• गायत्रीं वरदाभयाङ्कुश कशां शुभ्रं कपालं गदाम्।
gAyatrIm vardAbhayANkusha kashAm shubhram kapAlam gadAm.

• शंखं चक्रमथारविन्दयुगलं हस्तैर्वहन्ती भजै॥
shankham chakramathArvinda yugalam hastairvahantIm bhajE.

This shloka describes the form of वेदमाता गायत्री.

• It says, "She has five faces which shine with the colours of a Pearl 'मुक्ता', Coral 'विद्रुम', Gold 'हेम्', Sapphire 'नील्', & a Diamond 'धवलम्'.

• These five faces are symbolic of the five primordial elements called पञ्चमहाभूत:' which makes up the entire existence.

• These are the elements of SPACE, FIRE, WIND, EARTH & WATER.

• All these five faces shine with three eyes 'त्रिक्षणै:'.