#tatasteel - I expected 3rd to be over at 1246 and fall below 900 in 4th. But retracement was not enough. And hence the 3rd continued till 1481. May be inch a little higher but fair to call end of 3rd round about here.. 4th should take it to 1000 https://t.co/NWDc24fjJn

More from Harsh Mehta

More from Tatasteel

You May Also Like

Ivor Cummins has been wrong (or lying) almost entirely throughout this pandemic and got paid handsomly for it.

He has been wrong (or lying) so often that it will be nearly impossible for me to track every grift, lie, deceit, manipulation he has pulled. I will use...


... other sources who have been trying to shine on light on this grifter (as I have tried to do, time and again:


Example #1: "Still not seeing Sweden signal versus Denmark really"... There it was (Images attached).
19 to 80 is an over 300% difference.

Tweet: https://t.co/36FnYnsRT9


Example #2 - "Yes, I'm comparing the Noridcs / No, you cannot compare the Nordics."

I wonder why...

Tweets: https://t.co/XLfoX4rpck / https://t.co/vjE1ctLU5x


Example #3 - "I'm only looking at what makes the data fit in my favour" a.k.a moving the goalposts.

Tweets: https://t.co/vcDpTu3qyj / https://t.co/CA3N6hC2Lq
शमशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायी और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में अपने तीन वर्ष के बालक को रख के स्वयं चिता पे बैठ कर सती हो गयी ।इस प्रकार ऋषी दधीचि और उनकी पत्नी की मुक्ति हो गयी।


परन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़पने लगा। जब कुछ नहीं मिला तो वो कोटर में पड़े पीपल के गोदों (फल) को खाकर बड़ा होने लगा। कालान्तर में पीपल के फलों और पत्तों को खाकर बालक का जीवन किसी प्रकार सुरक्षित रहा।

एक दिन देवर्षि नारद वहां से गुजर रहे थे ।नारद ने पीपल के कोटर में बालक को देख कर उसका परिचय मांगा -
नारद बोले - बालक तुम कौन हो?
बालक - यही तो मैं भी जानना चहता हूँ ।
नारद - तुम्हारे जनक कौन हैं?
बालक - यही तो मैं भी जानना चाहता हूँ ।

तब नारद ने आँखें बन्द कर ध्यान लगाया ।


तत्पश्चात आश्चर्यचकित हो कर बालक को बताया कि 'हे बालक! तुम महान दानी महर्षि दधीचि के पुत्र हो । तुम्हारे पिता की अस्थियों का वज्रास्त्र बनाकर ही देवताओं ने असुरों पर विजय पायी थी।तुम्हारे पिता की मृत्यु मात्र 31 वर्ष की वय में ही हो गयी थी'।

बालक - मेरे पिता की अकाल मृत्यु का क्या कारण था?
नारद - तुम्हारे पिता पर शनिदेव की महादशा थी।
बालक - मेरे उपर आयी विपत्ति का कारण क्या था?
नारद - शनिदेव की महादशा।
इतना बताकर देवर्षि नारद ने पीपल के पत्तों और गोदों को खाकर बड़े हुए उस बालक का नाम पिप्पलाद रखा और उसे दीक्षित किया।