Surya Namaskar ☀️🙏- is the practice of paying respect to the Sun.

In Vedic tradition, the sun is a symbol of consciousness and the Divine and it is the ultimate source of life & energy.

Therefore Surya Namskar is considered as one of the most important Yog practices.

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It is characterized by the 12 different Yog Aasanas, that not only pay gratitude to the sun but also bestow the one practising it with several physical and mental health benefits.

It is said that our body has several chakras through which life energy or prana is
channelized to nourish us with good health.

Practising Surya Namaskar activates these chakras, and enhances the size of it, letting prana flow through freely. Thus, strengthening different parts of our body and improving our mental and cognitive abilities.
Best to practice it during sunrise as this is the time when the sun helps revitalize our body and refresh our mind.

The ‘Set of 12’ asanas is dedicated to Surya ( the solar deity) and each aasan is associated with a different mantra.👇🏼
Precautions To take :

To enjoy the benefits of Surya Namaskar, you need to be careful. Avoid practising it if you have:

Coronary artery disease
High blood pressure
Hernia
History of stroke
Periods
You can also follow this YT link to get an idea about the right postures.

https://t.co/FYAqZ5PLQl

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नवग्रह समिधा के नाम 🙏🏻🚩
(नवग्रह के पौधे एवं ग्रह शांति में उनके योगदान)

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों को अपने अनुकूल बनाने के लिए ‘वनस्पति’ की विशेष भूमिका रही है। उसके अनुसार पेड़-पौधों लगाने और इनके हवन-पूजन से ग्रहों संबंधी कई समस्याएं दूर होती हैं।

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ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की संख्या 9 बतायी गई है

सूय्र्यचन्द्रो मंगलश्च बुधश्चापि बृहस्पति:।
शुक्र: शनेश्चरो राहु: केतुश्चेति नव ग्रहा:।।

ऐसी मान्यता है कि इन ग्रहों की विभिन्न नक्षत्रों में स्थिति के अनुसार प्रत्येक मनुष्य पर इनके अलग-अलग प्रभाव पड़ते हैं,

ये प्रभाव अनुकूल और प्रतिकूल दोनों होते हैं। ग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों को शांत करने के लिए शास्त्रों में अनेक उपाय बताये गये हैं जिनमें एक उपाय ‘यज्ञ’ भी है।

यज्ञ द्वारा हर ग्रह शांति के लिए अलग अलग विशिष्ट वनस्पति की समिधा (हवन प्रकाष्ठ) प्रयोग की जाती है,

जैसा श्लोक में वर्णित है

“अर्क: पलाश: खदिरश्चापामार्गोऽथ पिप्पल:
औडम्बर: शमी दूव्र्वा कुशश्च समिध: क्रमात्”(गरुण पुराण)

अर्थात्

1-‘सूर्य ग्रह’ की शान्ति हेतू ‘अर्क (मदार)’ की समिधा का प्रयोग होता है मदार की लकड़ी में उसके पत्तों व गाय का घी मिलाकर हवन करने से रोग नाश होते हैं


2- चंद्र के लिए

पलाश के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु व महेश का निवास माना जाता है। पलाश के सूखे हुए फूल देवी देवताओं को कार्तिक माह में चढ़ाने से ग्रह बाधा दूर हो जाती है।

इसके वृक्ष को घर से दक्षिण-पूर्व (southeast) दिशा में लगाना चाहिए
जानिये क्यूँ की जाती है गोवर्धन पूजा 🙏🏻

“गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।
विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव।।

देवराज इन्द्र के अभिमान को चूर करने हेतु भगवान श्री कृष्ण ने, जो स्वयं लीलाधारी श्री हरि विष्णु के अवतार हैं ने एक लीला रची।

#GovardhanPuja


प्रभु की इस लीला में यह हुआ कि एक दिन प्रभु ने देखा के सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे। श्री कृष्ण ने बड़े भोलेपन से मईया यशोदा से प्रश्न किया " मईया ये आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं" कृष्ण की बातें सुनकर मैया बोली -

“लल्ला हम देवराज इन्द्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं।”

मैया के ऐसा कहने पर श्री कृष्ण बोले मैया हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं ?

मैया ने कहा वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की पैदावार होती है उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है।

भगवान श्री कृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं, इस दृष्टि से गोर्वधन पर्वत ही पूजनीय है और इन्द्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए।

लीलाधारी की लीला और माया से सभी ने इन्द्र के बदले गोवर्घन पर्वत की पूजा की।

देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। प्रलय के समान वर्षा देखकर सभी बृजवासी भगवान को लगने लगा कि ये सब श्री कृष्ण की बात मानने के फलस्वरूप हुआ
27 नक्षत्रों के 27 वृक्ष (नक्षत्र राशि तथा ग्रह के लिए निर्धारित पेड़ पौधे)

जिस प्रकार प्रत्येक ग्रह और राशियों के अपने-अपने वृक्ष होते हैं ठीक बैसे ही प्रत्येक नक्षत्र के भी अपने वृक्ष होते हैं। अपने वृक्ष होने का अर्थ है जो उस ग्रह या नक्षत्रों के प्रतिनिधि हों।
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या ऐसे वृक्ष जिन पर उक्त ग्रहों का प्रभाव रहता है इसलिए वैदिक साहित्य में “वृक्ष पूजन” का स्पष्ट निर्देश दिया गया है

जब भी कोई व्यक्ति बहुत परेशानियों में घिर जाता है (चाहे उस परेशानी का कारण कुछ भी हो) तब ज्योतिषी, जन्मकुंडली के आधार पर सबसे पहले यह जानने का प्रयास करते हैं कि

किस ग्रह नक्षत्र, राशि वा राशि स्वामी के कारण वह जातक परेशान है।

पुनः उस ग्रह अथवा राशि के कारकत्व को आधार बनाकर जातक के परेशानी को दूर करता है। उन कारकतत्व में पेड़-पौधे भी आते है। जन्म कुंडली में बुरे ग्रहो के प्रभाव को कम करने के लिए तथा शुभ ग्रहो के शुभत्त्व को बढ़ाने के लिए

निर्धारित पेड़-पौधों की सेवा तथा उसके जड़ को धारण करने का विधान है।

ऊपर दिए गए चित्र में चारों तरफ 3 घेरे बने हुए हैं जो सबसे ‘पहला घेरा’ है उसमें ‘27 नक्षत्रों’ के नाम हैं और उनकी पोधो के नाम साथ में लिखे हुए हैं

‘दूसरे घेरे’ में ‘12 राशियों’ के नाम उनके पौधों के साथ लिखे हुए

और ‘तीसरे घेरे’ में ‘नौ ग्रहों’ के नाम लिखे हुए हैं और उनसे संबंधित पेड़ पौधों के नाम भी लिखे हुए हैं।

ग्रह,राशि,नक्षत्र के आसार पेड़-पौधे प्रयोग करने से अंतश्चेतना में सकारात्मक सोच का संचार होता है और वे परिस्थितियों को अनुकूल करने में सहायक सिद्ध होते हैं

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I’m torn on how to approach the idea of luck. I’m the first to admit that I am one of the luckiest people on the planet. To be born into a prosperous American family in 1960 with smart parents is to start life on third base. The odds against my very existence are astronomical.


I’ve always felt that the luckiest people I know had a talent for recognizing circumstances, not of their own making, that were conducive to a favorable outcome and their ability to quickly take advantage of them.

In other words, dumb luck was just that, it required no awareness on the person’s part, whereas “smart” luck involved awareness followed by action before the circumstances changed.

So, was I “lucky” to be born when I was—nothing I had any control over—and that I came of age just as huge databases and computers were advancing to the point where I could use those tools to write “What Works on Wall Street?” Absolutely.

Was I lucky to start my stock market investments near the peak of interest rates which allowed me to spend the majority of my adult life in a falling rate environment? Yup.